The Reader In Hindi 95%

उसने मुझे राहत के बजाय चिड़चिड़ी नज़रों से देखा। वह बत्तीस-छत्तीस की थी, भारी-भरकम शरीर वाली नहीं, बल्कि सुडौल और साफ़-सुथरी। उसका चेहरा जानवरों जैसा था – कोमल और खतरनाक दोनों। उसने कहा, "बीमार लड़के को घूमना नहीं चाहिए।"

लेकिन असली चीज़ अगले दिन शुरू हुई। The Reader In Hindi

अगले दिन मैं अपने पिता की शेल्फ से 'एमिलीया गालोटी' चुरा लाया। वह बैठी, मेज़ पर हाथ रखे, मेरी तरफ देखती रही। मैंने पढ़ना शुरू किया। आवाज़ें, संवाद, नाटक। वह सिर्फ सुनती थी। एक बार मैंने रुककर देखा – उसकी आँखों में पानी था। लेकिन उसने कभी किताब की तरफ नहीं देखा। कभी उँगली नहीं फिराई। मेज़ पर हाथ रखे

मैं पंद्रह साल का था जब मुझे पीलिया हो गया। सारा मोहल्ला उस बीमारी से काँप रहा था। स्कूल बंद थे, और मैं अपनी माँ की देखभाल में घर पर पड़ा था। एक दिन, जब उबासी लेते-लेते मेरी जान निकलने लगी, तो मैं बिना बताए घर से निकल भागा। एक कोर्टरूम में

मैं नहीं जानता था कि उस रात मैंने एक रहस्य छेड़ दिया था – एक ऐसा रहस्य जो बीस साल बाद, एक कोर्टरूम में, मुझे उस महिला को एक यहूदी लेखक की किताब का हवाला देते हुए जेल भेजते हुए देखेगा। उस रहस्य का नाम था: । उस शर्म के लिए उसने अपनी आज़ादी कुर्बान कर दी, क्योंकि उसे यह बताने से बेहतर लगा कि उसने नाज़ी गार्ड के रूप में काम किया, बजाय इसके कि वह यह कहे कि वह 'पढ़ नहीं सकती'।

मैं उसे 'हाना' कहता था। वह ट्राम में टिकट पंच करती थी। हर शाम मैं उसके पास जाता, नहाता, और फिर पढ़ता – 'ओडिसी', 'वॉर एंड पीस', 'द लेडी विद द डॉग'। वह एक साधारण अनपढ़ महिला लगती थी, लेकिन जब मैं पढ़ता, तो वह एक रानी बन जाती थी। वह हर पात्र के दर्द को अपने शरीर में समेट लेती थी।

एक दिन मैंने पूछा, "हाना, तुम कभी खुद क्यों नहीं पढ़ती?"